जबलपुर के दूषित पेयजल मामले पर NGT सख्त, कलेक्टर और नगर निगम से दो हफ्ते में मांगी रिपोर्ट

जबलपुर 

जबलपुर में नालों के बीच से गुजर रही पेयजल पाइपलाइन और दूषित पानी की शिकायतों को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। संज्ञान लेते हुए एनजीटी ने जिला प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर नारजगी जाहिर की। 

सुनवाई के दौरान गुरुवार को एनजीटी ने कहा कि पहले दिए गए आदेश के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने मौके पर जाकर जांच करने की जहमत तक नहीं उठाई। प्रशासन की निष्क्रियता के बाद गठित नोडल एजेंसी ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया कि जिला प्रशासन और नगर निगम के असहयोग के कारण स्थल निरीक्षण नहीं हो सका।

47% पानी पीने योग्य नहीं
नोडल एजेंसी की जांच में सामने आया कि जबलपुर शहर की करीब 80 प्रतिशत पेयजल पाइपलाइन नालियों के बीच से गुजर रही है, जबकि 47 प्रतिशत पानी पीने योग्य नहीं है। इस रिपोर्ट के बाद एनजीटी ने अधिकारियों की लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई।

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प्रशासन ने नहीं दी रिपोर्ट
नागरिक उपभोक्ता मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव की ओर से दायर याचिका पर एनजीटी ने नगर निगम और जिला प्रशासन से एक महीने में रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन निर्धारित समय में रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई।

असहयोग को बताया 'गंभीर'
10 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई में मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनजीटी को बताया कि नगर निगम और जिला प्रशासन के सहयोग नहीं करने के कारण संयुक्त निरीक्षण नहीं हो पाया। विभागों के बीच समन्वय की कमी भी सामने आई।

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एनजीटी के न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार ने इसे गंभीर और आपत्तिजनक बताते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया कि संबंधित अधिकारियों के साथ संयुक्त निरीक्षण कर दो सप्ताह के भीतर अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

कलेक्टर और निगम आयुक्त को पत्र लिखने के निर्देश
न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह ने एनजीटी रजिस्ट्रार को निर्देश दिए कि जबलपुर कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को तत्काल पत्र भेजकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ स्थल निरीक्षण में सहयोग सुनिश्चित कराया जाए।

40-50 साल पुरानी पाइपलाइन पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता प्रभात यादव ने बताया कि शहर की अधिकांश पेयजल पाइपलाइन 40 से 50 वर्ष पुरानी हैं और कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। इसके बावजूद उन्हें बदलने या मरम्मत करने के लिए न तो कोई ठोस योजना बनाई गई और न ही डीपीआर तैयार की गई।

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काले और बदबूदार पानी का मुद्दा

गौरतलब है कि इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद जबलपुर के राजीव गांधी वार्ड में नलों से काला और दुर्गंधयुक्त पानी आने का मामला प्रमुखता से उठाया था। स्थानीय लोगों का आरोप था कि पेयजल पाइपलाइन नाले के भीतर से गुजर रही है। पाइपलाइन में लीकेज होने के कारण नाले का गंदा पानी पेयजल में मिलकर घरों तक पहुंच रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

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